न तो प्यार लेता हूँ ,
और न ही तिरिस्कार |
मैं तो बस करता हूँ ,
अपने लिए नियत हर कार्य |
कर्म फल लुभाता जरुर ,
पथ से डिगा सकता नहीं |
फिसलन इतनी है पथ पर ,
पग पग पे पांव जमाता हूँ |
जाना है जिस डगर मुझे ,
उस पथ पे पांव थिराता हूँ |
कुछ बाधाएं कुछ विपदाएं ,
पथ की पहचान कराती हैं |
कुछ अनजानी सी भाषाएँ ,
अपनों की भान कराती है |
मैं कर्मयोगी विमुख क्यों होऊं ,
कर्म फल के स्वादों से |
मैं चलता हूँ जिस पथ पर ,
वही मेरी कहानी है |
मैं जिन्दा हूँ ,
इसकी जिवंत निशानी है |
जब भी भाव हिचकोले लेने लगते हैं अंतस में, लिखता हूँ| कुछ पता नहीं होता क्या लिखना है ..बस लिखता जाता हूँ ...और शेयर कर लेता हूँ आप सब से ....
...कुंवर...
कितने कल के बाद ...
देखो "आज " आया |
संग लग ले ---
क्या पता फिर आए न आए |
मीरा को गिरधर जी मिले थे
इसी आज में |
अर्जुन का द्वंद छठा था
इसी आज में |
अनुपम वेला ---
संधि वेला ------(ब्र्ह्ममुहुर्त की वेला )
भी मिलती है ---
इसी आज में |
शंकर की ये 'मोक्ष 'हो --
या फिर बुद्ध की 'निर्वाण '--
या फिर पातंजल का 'कैवल्य '--
ये सब मिलते हैं इसी आज में |
कितने कल के बाद--
देखो "आज " आया |
जो भी है बो "आज "है भैया--
कल तो --
धोखे की पहली किरण है|
जो भी है बो आज है भैया ---
बस आज है भैया ---
चाहे जितना भी नुरा-कुश्ती कर ले ये मेरी बुद्धि मेरे मन से लेकिन तब तक कुछ नही पायेगा जब तक आज को जीना न सिख ले सम्पूर्णता से |कुछ मिलने बाला नही ---
कुंवर -------
कहाँ से ढूंढ लाऊँ ...